खबरमध्य प्रदेशसिंगरौली

चितरंगी में ‘सत्ता की आड़’ में खेल पाला बदलते ही तेज हुए अवैध कारोबार, आदिवासियों पर बढ़ा दबाव

चितरंगी में ‘सत्ता की आड़’ में खेल पाला बदलते ही तेज हुए अवैध कारोबार, आदिवासियों पर बढ़ा दबाव

सिंगरौली : जिले के चितरंगी विकासखंड से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पंचायत चुनाव में कांग्रेस समर्थित रहे एक प्रत्याशी ने जीत के कुछ ही दिनों बाद सत्ता पक्ष से नजदीकियां बढ़ा लीं। आरोप है कि इस राजनीतिक बदलाव के बाद संबंधित जनप्रतिनिधि के अवैध कारोबारों को न सिर्फ संरक्षण मिला, बल्कि उनकी रफ्तार भी तेज हो गई है।

“खासम-खास” का दावा, प्रशासन पर दबाव?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर संचालन से जुड़े इस व्यक्ति ने अब खुद को राज्य मंत्री और शीर्ष नेताओं का करीबी बताना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी प्रभाव के चलते शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अमला कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

अवैध खनन-परिवहन को मिला संरक्षण

क्षेत्र में लंबे समय से चल रही अवैध खनन और परिवहन गतिविधियों में इस जनप्रतिनिधि की संलिप्तता की चर्चा पहले भी रही है। आरोप है कि सत्ता से समीपता बढ़ने के बाद इन गतिविधियों में अचानक तेजी आई है और अब ये बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रही हैं।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें संबंधित विभागों तक पहुंचाई गईं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सत्ता का दबाव इतना प्रभावी है कि अधिकारी भी कानून लागू करने में असमर्थ हो गए हैं?

आदिवासी परिवारों का शोषण

इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू आदिवासी परिवारों का कथित शोषण है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध कारोबार के लिए उनकी जमीन और संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि उन्हें न उचित मजदूरी मिल रही है और न ही सुरक्षा। विरोध करने पर डराने-धमकाने और सत्ता का भय दिखाने के भी आरोप सामने आए हैं।

राजनीतिक नैतिकता पर सवाल

चुनाव के दौरान एक विचारधारा के समर्थन से जीत हासिल कर बाद में सत्ता के करीब जाकर व्यक्तिगत हित साधने की प्रवृत्ति ने राजनीतिक नैतिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होने की आशंका है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

यदि समय रहते प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो मामला व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है

— शेष अगले अंक में…

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button