बड़वारा में बेलगाम ओवरलोडिंग: सड़कों पर दौड़ते खतरे, गिरती गिट्टी से हर पल हादसे का डर
बड़वारा में बेलगाम ओवरलोडिंग: सड़कों पर दौड़ते खतरे, गिरती गिट्टी से हर पल हादसे का डर

कटनी : आनंद दाहिया
कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि आम लोगों का सड़क पर सुरक्षित चलना भी मुश्किल हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल थाना क्षेत्र के आसपास ही खुलेआम चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा बना हुआ है स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहन निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक रेत, मुरूम और बॉक्साइट लादकर दिन-रात गुजर रहे हैं यह ओवरलोडिंग अब सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं रही, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा बन चुकी है।
गिरती गिट्टी से बढ़ रहा खतरा
ओवरलोड ट्रकों से रास्ते में लगातार गिट्टी और पत्थर गिरते रहते हैं, जिससे सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं खासकर दोपहिया चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है , अचानक गिरते पत्थरों से वाहन चालक असंतुलित हो सकते हैं ,छोटे वाहनों के शीशे टूटने और चोट लगने का खतरा, सड़क पर फैली गिट्टी से फिसलन और बड़े हादसों की आशंका
हर दिन मंडरा रहा दुर्घटना का खतरा
क्षेत्र में लगातार हादसों का खतरा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहे। सवाल यह उठता है कि जब स्थिति इतनी स्पष्ट है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
“सेटिंग” के आरोप, सिस्टम पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना किसी मिलीभगत के इस तरह का अवैध परिवहन संभव नहीं है। कई वाहन बिना वैध ट्रांजिट पास (TP) के खनिज ढोते नजर आ रहे हैं, जिससे पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले से जिले तक फैला नेटवर्क
जानकारी के अनुसार बरही से बड़वारा और उमरिया से कटनी तक अवैध खनिज परिवहन का नेटवर्क सक्रिय है। दिन-रात चल रहे इस खेल ने नियम-कानून को पूरी तरह बेअसर बना दिया है।
निर्देशों की अनदेखी?
उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद यदि हालात जस के तस बने हुए हैं, तो यह गंभीर लापरवाही या फिर मिलीभगत का संकेत देता है।
जनता में बढ़ता आक्रोश
लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए क्षेत्र के लोग अब सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि सड़कों पर आम नागरिक सुरक्षित रह सकें।
सबसे बड़ा सवाल : क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा, या समय रहते इन “चलते-फिरते खतरों” पर लगाम लगेगी?













