“कटनी में कोयला माफियाओं का काला साम्राज्य! रेलवे से झाड़ू मारकर जमा हो रहा कोयला, करोड़ों का राजस्व डकार रहा अवैध नेटवर्क”
“कटनी में कोयला माफियाओं का काला साम्राज्य! रेलवे से झाड़ू मारकर जमा हो रहा कोयला, करोड़ों का राजस्व डकार रहा अवैध नेटवर्क”

मनोज सिंह परिहार | कटनी
कटनी जिले में अवैध कोयला कारोबार अब संगठित माफिया तंत्र का रूप ले चुका है। हालात ऐसे हैं कि रेलवे स्टेशनों से लेकर शहर और ग्रामीण इलाकों तक कोयले की काली कमाई का खेल खुलेआम चल रहा है, और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे की बोगियों की सफाई के नाम पर झाड़ू मार-मारकर कोयला इकट्ठा किया जा रहा है। इस कोयले को मजदूरों के जरिए एकत्र कर ट्रैक्टर, छोटे वाहनों और अन्य साधनों से गुप्त ठिकानों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में बनाए गए अवैध प्लांट और गोदामों में इसका भंडारण कर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है इस पूरे नेटवर्क के चलते शासन को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर बिना किसी वैध दस्तावेज के भारी मात्रा में कोयले का स्टॉक जमा है, जहां से लगातार सप्लाई जारी है जानकारी के मुताबिक, शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक छोटे-बड़े कई गुप्त ठिकाने बनाए गए हैं, जहां अवैध रूप से कोयला जमा कर एक संगठित नेटवर्क के तहत इसका कारोबार संचालित किया जा रहा है। यह भी सामने आया है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में माफियाओं के हौसले बुलंद हैं हालांकि पूर्व में जीएसटी विभाग एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा कुछ कार्रवाई की गई थी, लेकिन वह नाकाफी साबित हुई और अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध कारोबार और भी फैल सकता है, जिससे शासन को और अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कटनी में कोयला माफियाओं के इस काले साम्राज्य पर कब तक लगाम लगेगी? और जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे?













