उत्तरप्रदेशखबरप्रयागराज

उरुवा बाल विकास परियोजना में ‘सुविधा शुल्क’ का खेल? रजिस्टर जब्त कर मानदेय रोकने की धमकी के आरोप

7 माह तक नहीं हुआ निरीक्षण, अचानक कार्रवाई से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश — रिश्वत न देने वालों पर दबाव बनाने का आरोप

मेजा (प्रयागराज)। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करने वाली सरकार के बीच प्रयागराज जनपद के मेजा तहसील अंतर्गत उरुवा ब्लॉक की बाल विकास परियोजना इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय अधिकारियों और सुपरवाइजरों पर सुविधा शुल्क (रिश्वत) मांगने, रजिस्टर जब्त करने और मानदेय रोकने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं मिली जानकारी के अनुसार उरुवा ब्लॉक क्षेत्र में संचालित बाल विकास परियोजना कार्यालय की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में तैनात कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सुविधा शुल्क की मांग की जा रही है और जो कार्यकर्ता यह राशि देने से इंकार कर रहे हैं, उनके रजिस्टर कार्यालय में जमा कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, मानदेय भुगतान रोकने तक की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है सूत्रों के मुताबिक, पिछले लगभग सात माह से अधिक समय तक क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का कोई नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। इस दौरान न तो केंद्रों की व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई और न ही वहां संचालित योजनाओं का जायजा लिया गया। लेकिन अचानक विभागीय निरीक्षण अभियान शुरू कर कई केंद्रों पर पहुंची सुपरवाइजर ने विभिन्न कमियां बताते हुए कई कार्यकर्ताओं के रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान मौखिक रूप से साफ कहा गया कि यदि सुविधा शुल्क जमा नहीं किया गया तो रजिस्टर वापस नहीं किए जाएंगे और मानदेय भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इस कथित दबाव के बाद कार्यकर्ताओं में भय और नाराजगी का माहौल बन गया है बताया जा रहा है कि क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के रजिस्टर कार्यालय में जमा करा लिए गए हैं। आरोप यह भी है कि जिन लोगों ने सुविधा शुल्क दे दिया, उन्हें आसानी से राहत मिल गई जबकि बाकी लोगों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्र केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की आधारशिला माने जाते हैं। इन्हीं केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में यदि विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार अथवा सुविधा शुल्क जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ना तय है स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग अपना पक्ष रखता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा अब बड़ा सवाल यह है कि जब सात माह तक निरीक्षण व्यवस्था निष्क्रिय रही तो अचानक कार्रवाई क्यों शुरू हुई? यदि केंद्रों में कमियां थीं तो उन्हें पहले क्यों नहीं सुधारा गया? क्या वास्तव में सुविधा शुल्क के नाम पर दबाव बनाया जा रहा है या फिर यह केवल आरोप हैं? इन तमाम सवालों का जवाब अब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल उरुवा ब्लॉक की बाल विकास परियोजना में लगे भ्रष्टाचार और सुविधा शुल्क वसूली के आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है और अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button