रीवा में ‘नशे का नेक्सस’ बेनकाब! मेडिकल स्टोर बने जहर के अड्डे, सिस्टम पर सीधे सवाल
ड्रग इंस्पेक्टर राधेश्याम वाटी पर संरक्षण के आरोप, कथित वसूली से फल-फूल रहा अवैध कारोबार; पत्रकार को धमकी से गरमाया मामला, युवा पीढ़ी खतरे में

मऊगंज/रीवा (मध्यप्रदेश):
मध्यप्रदेश सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं रीवा जिले से सामने आ रही तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। आरोप है कि जनता की सेवा में बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारी ही व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं और इलाज के नाम पर नशे का जाल फैलने दे रहे हैं।
इलाज की दुकानों में ‘जहर का खेल’!
रीवा जिले में मेडिकल स्टोर, जो जीवन रक्षक दवाओं के लिए जाने जाते हैं, अब कथित तौर पर नशे की दवाओं के खुलेआम कारोबार के केंद्र बनते जा रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि गली-गली में बिना किसी पर्ची के नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बेची जा रही हैं—और यह सब खुलेआम हो रहा है, जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।
इलाज के नाम पर ‘नशे का जाल’
हैरान करने वाली बात यह है कि जिन दुकानों पर मरीजों को राहत मिलनी चाहिए, वहीं अब युवाओं को नशे की लत की ओर धकेला जा रहा है आरोप है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है
“सेटिंग” के दम पर चल रहा कारोबार?
मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच एक ही चर्चा जोरों पर है—
“लाइसेंस तो सिर्फ दिखावे के लिए है, असली खेल हर महीने की सेटिंग का है।”
आरोप है कि दुकानदारों से कथित रूप से नियमित वसूली की जाती है और बदले में उन्हें किसी भी प्रकार की दवाएं बेचने की खुली छूट मिल जाती है।
दुकानदारों की जुबान पर एक ही बात—
“दुकान चलानी है तो ‘गांधी जी’ देने पड़ेंगे, वरना कार्रवाई तय है।”
ड्रग इंस्पेक्टर राधेश्याम वाटी पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में ड्रग इंस्पेक्टर राधेश्याम वाटी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
सूत्रों का दावा है कि जिले भर के मेडिकल स्टोरों से हर महीने भारी रकम की कथित वसूली होती है, जिसके कारण नशे की दवाओं का कारोबार बेखौफ जारी है हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मामला सामने आया है, उसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी दावों बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ राज्य सरकार नशा मुक्त अभियान के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उप मुख्यमंत्री डॉ. राजेन्द्र शुक्ला के गृह जिले में ऐसे हालात सामने आना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है।
पत्रकार को धमकी, चौथे स्तंभ पर चोट
मामला तब और गंभीर हो गया जब एक पत्रकार ने इस मुद्दे पर ड्रग इंस्पेक्टर से सवाल पूछने की कोशिश की।
आरोप है कि सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकार को ही एफआईआर की धमकी दी गई और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
इस घटना ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, नशे की दवाओं की आसान उपलब्धता के कारण युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
कई परिवार इस समस्या से जूझ रहे हैं और अभिभावकों में गहरी चिंता है।
लोगों का साफ कहना है—
“अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।”












